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mahabharat 4.18.29: पाण्डुनन्दन! देखो, पाण्डुपुत्र युधिष्ठिर, जिनकी राजसभा में ऋषियों सहित अनेक राजा लोग पूजा करते थे, आज किसी और की पूजा कर रहे हैं॥29॥   |   mahabharat अध्याय 4.18: द्रौपदीका भीमसेनके प्रति अपने दु:खके उद्‍गार प्रकट करना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 18: द्रौपदीका भीमसेनके प्रति अपने दु:खके उद्‍गार प्रकट करना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  4.18.29 
यमुपासन्त राजान: सभायामृषिभि: सह।
तमुपासीनमद्यान्यं पश्य पाण्डव पाण्डवम्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
पाण्डुनन्दन! देखो, पाण्डुपुत्र युधिष्ठिर, जिनकी राजसभा में ऋषियों सहित अनेक राजा लोग पूजा करते थे, आज किसी और की पूजा कर रहे हैं॥29॥
 
Pandunandan! Look, Pandu's son Yudhishthir, whom many kings used to worship along with the sages in the royal court, is today worshiping someone else. 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)