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mahabharat 4.18.28: सूर्य के समान अपने तेज से सम्पूर्ण जगत् को प्रकाशित करके धर्मराज युधिष्ठिर अब राजा विराट के दरबार के एक साधारण सदस्य हो गए हैं॥ 28॥   |   mahabharat अध्याय 4.18: द्रौपदीका भीमसेनके प्रति अपने दु:खके उद्‍गार प्रकट करना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 18: द्रौपदीका भीमसेनके प्रति अपने दु:खके उद्‍गार प्रकट करना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  4.18.28 
प्रताप्य पृथिवीं सर्वां रश्मिमानिव तेजसा।
सोऽयं राज्ञो विराटस्य सभास्तारो युधिष्ठिर:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
सूर्य के समान अपने तेज से सम्पूर्ण जगत् को प्रकाशित करके धर्मराज युधिष्ठिर अब राजा विराट के दरबार के एक साधारण सदस्य हो गए हैं॥ 28॥
 
Having illuminated the entire world with his brilliance like the Sun, Dharmaraja Yudhishthira has now become an ordinary member of King Virat's court.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)