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mahabharat 4.18.26: इन्द्रप्रस्थ में रहते हुए सभी राजा जिन लोगों को दान देते थे, वही लोग आज अपने भरण-पोषण के लिए दूसरों से धन पाने की इच्छा रखते हैं।   |   mahabharat अध्याय 4.18: द्रौपदीका भीमसेनके प्रति अपने दु:खके उद्‍गार प्रकट करना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 18: द्रौपदीका भीमसेनके प्रति अपने दु:खके उद्‍गार प्रकट करना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  4.18.26 
इन्द्रप्रस्थे निवसत: समये यस्य पार्थिवा:।
आसन् बलिभृत: सर्वे सोऽद्यान्यैर्भृतिमिच्छति॥ २६॥
 
 
अनुवाद
इन्द्रप्रस्थ में रहते हुए सभी राजा जिन लोगों को दान देते थे, वही लोग आज अपने भरण-पोषण के लिए दूसरों से धन पाने की इच्छा रखते हैं।
 
The same people to whom all the kings used to give gifts while living in Indraprastha, today desire to get money from others for their maintenance. 26.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)