श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 18: द्रौपदीका भीमसेनके प्रति अपने दु:खके उद्‍गार प्रकट करना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  4.18.24 
अन्धान् वृद्धांस्तथानाथान् बालान् राष्ट्रेषु दुर्गतान्।
बिभर्ति विविधान् राजा धृतिमान् सत्यविक्रम:।
संविभागमना नित्यमानृशंस्याद् युधिष्ठिर:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
अपने सौम्य स्वभाव के कारण धैर्यवान और पराक्रमी राजा युधिष्ठिर सदैव सबको भोजन कराने में तत्पर रहते थे और वे अपने राज्य के अंधे, वृद्ध, अनाथ, बालक और दुःखी लोगों का भरण-पोषण करते थे॥ 24॥
 
Due to his gentle nature, the patient and valiant King Yudhishthira always devoted himself to providing food to everyone and he used to provide for the blind, old people, orphans, children and the distressed people of his kingdom.॥ 24॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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