श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 18: द्रौपदीका भीमसेनके प्रति अपने दु:खके उद्‍गार प्रकट करना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  4.18.23 
आनृशंस्यमनुक्रोशं संविभागस्तथैव च।
यस्मिन्नेतानि सर्वाणि सोऽयमास्ते नरेश्वर:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
जो महाराज कोमलता, दया और सबको भोजन-वस्त्र प्रदान करने जैसे सभी सद्गुणों से युक्त थे, वही महाराज आज ऐसी दयनीय स्थिति में हैं॥ 23॥
 
The same Maharaja who possessed all the good qualities like tenderness, kindness and providing food and clothes to everyone, is today in such a miserable condition.॥ 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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