श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 18: द्रौपदीका भीमसेनके प्रति अपने दु:खके उद्‍गार प्रकट करना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  4.18.11 
को हि राज्यं परित्यज्य सर्वस्वं चात्मना सह।
प्रव्रज्यायैव दीव्येत विना दुर्द्यूतदेविनम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
उस निंदनीय जुए के आदी जुआरी के अतिरिक्त और कौन ऐसा है जो इस शर्त पर जुआ खेलेगा कि वह अपना राज्य आदि सब कुछ त्यागकर वनवास चला जाए?॥ 11॥
 
Besides that gambler who is addicted to condemnable gambling, who else would gamble on the condition that he would give up his kingdom and everything else and go into exile?॥ 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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