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mahabharat 4.18.10: अपने उस बड़े भाई की निन्दा करो जो अशुद्ध जुए में लगा हुआ है, जिसके कुकर्मों के कारण मैं इस अनंत दुःख में पड़ा हूँ ॥10॥   |   mahabharat अध्याय 4.18: द्रौपदीका भीमसेनके प्रति अपने दु:खके उद्‍गार प्रकट करना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 18: द्रौपदीका भीमसेनके प्रति अपने दु:खके उद्‍गार प्रकट करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  4.18.10 
भ्रातरं च विगर्हस्व ज्येष्ठं दुर्द्यूतदेविनम्।
यस्यास्मि कर्मणा प्राप्ता दु:खमेतदनन्तकम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
अपने उस बड़े भाई की निन्दा करो जो अशुद्ध जुए में लगा हुआ है, जिसके कुकर्मों के कारण मैं इस अनंत दुःख में पड़ा हूँ ॥10॥
 
Criticize your elder brother who is engaged in impure gambling, due to whose misdeeds I have fallen into this infinite misery. ॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)