श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 18: द्रौपदीका भीमसेनके प्रति अपने दु:खके उद्‍गार प्रकट करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  4.18.1 
द्रौपद्युवाच
अशोच्यत्वं कुतस्तस्य यस्या भर्ता युधिष्ठिर:।
जानन् सर्वाणि दु:खानि किं मां त्वं परिपृच्छसि॥ १॥
 
 
अनुवाद
द्रौपदी बोली, "जिस स्त्री के पति राजा युधिष्ठिर हैं, उसका दुःख रहित रहना कैसे संभव है? मेरे सारे दुःखों को जानते हुए भी आप मुझसे यह कैसे पूछ सकते हैं?"
 
Draupadi said, "How is it possible for a woman whose husband is King Yudhishthira to live without grief? Knowing all my sorrows, how can you ask me this?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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