श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 17: द्रौपदीका भीमसेनके समीप जाना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  4.17.21 
शीघ्रमुक्त्वा यथाकामं यत् ते कार्यं विवक्षितम्।
गच्छ वै शयनायैव पुरा नान्येन बुध्यते॥ २१॥
 
 
अनुवाद
इसलिए जो कुछ तुम्हारा हित हो और जो कुछ तुम कहना चाहते हो, उसे शीघ्र कहो और फिर अपने शयन-कक्ष में चले जाओ, जिससे किसी और को इसका पता न चले।॥21॥
 
Therefore, whatever your interest may be and whatever you wish to say something about, say it quickly and then go to your bedroom, so that no one else may come to know of it.'॥ 21॥
 
इति श्रीमहाभारते विराटपर्वणि कीचकवधपर्वणि द्रौपदीभीमसंवादे सप्तदशोऽध्याय:॥ १७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत विराटपर्वके अन्तर्गत कीचकवधपर्वमें द्रौपदी-भीम-संवादविषयक सत्रहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १७॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)