श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 17: द्रौपदीका भीमसेनके समीप जाना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  4.17.20 
अहमेव हि ते कृष्णे विश्वास्य: सर्वकर्मसु।
अहमापत्सु चापि त्वां मोक्षयामि पुन: पुन:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
'कृष्ण! मैं ही तुम्हारा विश्वासपात्र हूँ। मैं ही सब प्रकार के संकटों में बार-बार तुम्हारी सहायता करता हूँ और तुम्हें संकटों से मुक्त करता हूँ।
 
‘Krishna! I am your confidant for all tasks. I am the one who helps you again and again in all kinds of troubles and frees you from troubles.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)