श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 17: द्रौपदीका भीमसेनके समीप जाना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  4.17.15 
उत्तिष्ठोत्तिष्ठ किं शेषे भीमसेन यथा मृत:।
नामृतस्य हि पापीयान् भार्यामालभ्य जीवति॥ १५॥
 
 
अनुवाद
"भीमसेन! उठो, उठो, तुम मरे हुए की तरह क्यों सो रहे हो? क्योंकि कोई भी महापापी मनुष्य जीवित रहते हुए (तुम्हारे समान वीर) पुरुष की पत्नी का स्पर्श करके जीवित नहीं रह सकता।" ॥15॥
 
"Bhimasena! Get up, get up, why are you sleeping like a dead man? Because no great sinner can remain alive after touching the wife of a man (as brave as you) while he is alive." ॥15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)