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श्लोक  4.16.d91 
एतत् ते कथितं सर्वं कीचकस्य पराक्रमम्॥
द्रौपदी न शशापैनं यस्मात् तद् गदत: शृणु।
 
 
अनुवाद
जनमेजय! इस प्रकार मैंने तुम्हें कीचक के पराक्रम के बारे में सब कुछ बता दिया। अब यह भी सुनो कि द्रौपदी ने उसे शाप क्यों नहीं दिया।
 
Janamejaya! Thus I have told you all about Keechak's valour. Now also listen to why Draupadi did not curse him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)