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श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 16: कीचकद्वारा द्रौपदीका अपमान  »  श्लोक d85
 
 
श्लोक  4.16.d85 
तं प्राप्य बलसम्मत्तं विराट: पृथिवीपति:॥
जिगाय सर्वांश्च रिपून् यथेन्द्रो दानवानिव।
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार इन्द्र ने उस शक्तिशाली कीचक की सहायता से दैत्यों पर विजय प्राप्त की थी, उसी प्रकार राजा विराट ने भी अपने समस्त शत्रुओं पर विजय प्राप्त की।
 
Just like Indra conquered the demons with the help of that powerful Keechak, similarly King Virat also conquered all his enemies.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)