Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 4.16.d84: राजन! इस लोक में सर्वत्र प्रसिद्ध कालेय नामक राक्षस कीचड़ के रूप में उत्पन्न हुए थे। काले राक्षसों में वह बाण सबसे बड़ा था। वह समस्त अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित, घोर पराक्रमी और अत्यन्त बलशाली था, जिसने धर्म की मर्यादा को भंग किया था और मनुष्यों में भय की वृद्धि की थी। | mahabharat अध्याय 4.16: कीचकद्वारा द्रौपदीका अपमान । mahabharat पर्व 4: विराट पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कालेया नाम दैतेया: प्रायशो भुवि विश्रुता:।
जज्ञिरे कीचका राजन् बाणो ज्येष्ठस्ततोऽभवत्॥
स हि सर्वास्त्रसम्पन्नो बलवान् भीमविक्रम:।
कीचको नष्टमर्यादो बभूव भयदो नृणाम्।
अनुवाद
राजन! इस लोक में सर्वत्र प्रसिद्ध कालेय नामक राक्षस कीचड़ के रूप में उत्पन्न हुए थे। काले राक्षसों में वह बाण सबसे बड़ा था। वह समस्त अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित, घोर पराक्रमी और अत्यन्त बलशाली था, जिसने धर्म की मर्यादा को भंग किया था और मनुष्यों में भय की वृद्धि की थी।
Rajan! The demons named Kaley, who were generally famous in this world, were born in the form of mud. The arrow was the biggest among the black ones. He was the one equipped with all the weapons, fiercely brave and very powerful, who was the one who broke the dignity of religion and increased the fear of humans.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥