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श्री महाभारत
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पर्व 4: विराट पर्व
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अध्याय 16: कीचकद्वारा द्रौपदीका अपमान
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श्लोक d70
श्लोक
4.16.d70
कस्य वंशे समुद्भूत: स च दुर्ललितो मुने।
बलोन्मत्त: कथंचासीच्छॺालोमात्स्यस्यकीचक:॥
अनुवाद
मुनि! मत्स्यराज का साला दुष्ट कीचक किसके कुल में उत्पन्न हुआ था? और वह शक्ति के मद में क्यों मदमस्त हो गया था?
Muni! In whose family was the evil Keechak, brother-in-law of Matsyaraja, born? And why did he become mad with power?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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