श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 16: कीचकद्वारा द्रौपदीका अपमान  »  श्लोक d6
 
 
श्लोक  4.16.d6 
(यस्य चार्द्रस्य वृक्षस्य शीतच्छायां समाश्रयेत्।
न तस्य पर्णं द्रुह्येत पूर्ववृत्तमनुस्मरन्॥
 
 
अनुवाद
जिस हरे वृक्ष की शीतल छाया में हम रहते हैं, उसके एक पत्ते को भी हानि नहीं पहुँचानी चाहिए। उसके पूर्व उपकारों को सदैव स्मरण करके उसकी रक्षा करनी चाहिए।
 
‘One should not harm even a single leaf of the green tree under whose cool shade one lives. One should always remember its previous favours and protect it.’
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)