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mahabharat 4.16.d51: द्रौपदी, जो पूरे शरीर पर धूल से लिपटी हुई तथा हाथी की सूँड़ जैसी जांघों वाली, राजवधू के समान दिख रही थी, अपने स्वामी की आज्ञा स्वीकार करके राज दरबार से भीतरी कक्ष में चली गई।   |   mahabharat अध्याय 4.16: कीचकद्वारा द्रौपदीका अपमान   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  4.16.d51 
(पांसुकुण्ठितसर्वाङ्गी गजराजवधूरिव।
प्रतस्थे नागनासोरूर्भर्तुराज्ञाय शासनम्॥
 
 
अनुवाद
द्रौपदी, जो पूरे शरीर पर धूल से लिपटी हुई तथा हाथी की सूँड़ जैसी जांघों वाली, राजवधू के समान दिख रही थी, अपने स्वामी की आज्ञा स्वीकार करके राज दरबार से भीतरी कक्ष में चली गई।
 
Draupadi, looking like a royal bride covered in dust all over her body and having thighs like the trunk of an elephant, accepted her master's command and went from the royal court to the inner chambers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)