vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 4: विराट पर्व
»
अध्याय 16: कीचकद्वारा द्रौपदीका अपमान
»
श्लोक d43
श्लोक
4.16.d43
नास्ति कश्चित् स्त्रिया यज्ञो न श्राद्धं नाप्युपोषणम्।
या च भर्तरि शुश्रूषा सा स्वर्गायाभिजायते॥
अनुवाद
'स्त्री के लिए न कोई यज्ञ है, न कोई श्राद्ध और न कोई व्रत। स्त्रियों द्वारा अपने पतियों के प्रति की गई सेवा ही उन्हें स्वर्ग की प्राप्ति कराती है।'
‘There is no yajna, no shraddha and no fasting for a woman. The service rendered by women to their husbands is what will enable them to attain heaven.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×