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श्लोक 4.16.d29  |
वैशम्पायन उवाच
एवं विलपमानायां पाञ्चाल्यां मत्स्यपुङ्गव:।
अशक्त: कीचकं तत्र शासितुं बलदर्पितम्॥ |
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| अनुवाद |
| वैशम्पायन जी कहते हैं - हे राजन! पांचाल राजकुमारी द्रौपदी के इस प्रकार विलाप करने पर भी मत्स्यराज विराट अभिमानी कीचक पर शासन करने में असमर्थ रहे। |
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| Vaishmpayana says - O King! Despite the Panchal princess Draupadi lamenting in this manner, Matsya king Virat was unable to rule over the proud Keechak. |
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