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mahabharat 4.16.d26: ‘आसक्ति के कारण अच्छे या बुरे कर्म करने के बाद मनुष्य मृत्यु के बाद भी मन में पश्चाताप करता रहता है।’   |   mahabharat अध्याय 4.16: कीचकद्वारा द्रौपदीका अपमान   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  4.16.d26 
सुकृतं दुष्कृतं वापि कृत्वा मोहेन मानव:।
पश्चात्तापेन तप्येत स्वबुद्धॺा मरणं गत:॥
 
 
अनुवाद
‘आसक्ति के कारण अच्छे या बुरे कर्म करने के बाद मनुष्य मृत्यु के बाद भी मन में पश्चाताप करता रहता है।’
 
‘After committing good or bad deeds due to attachment, a man continues to repent in his mind even after death.’
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)