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श्लोक 4.16.d26  |
सुकृतं दुष्कृतं वापि कृत्वा मोहेन मानव:।
पश्चात्तापेन तप्येत स्वबुद्धॺा मरणं गत:॥ |
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| अनुवाद |
| ‘आसक्ति के कारण अच्छे या बुरे कर्म करने के बाद मनुष्य मृत्यु के बाद भी मन में पश्चाताप करता रहता है।’ |
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| ‘After committing good or bad deeds due to attachment, a man continues to repent in his mind even after death.’ |
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