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mahabharat 4.16.d25: 'परोपकारी मनुष्य कल्याण का भागी होता है और पापी मनुष्य पाप के फलस्वरूप दुःख का भागी होता है। जो भी इनके सम्पर्क में आता है, वह भी (अपने कर्मानुसार) स्वर्ग या नरक में जाता है।'   |   mahabharat अध्याय 4.16: कीचकद्वारा द्रौपदीका अपमान   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  4.16.d25 
कल्याणकारी कल्याणं पापकारी च पापकम्।
तेन गच्छति संसर्गं स्वर्गाय नरकाय वा॥
 
 
अनुवाद
'परोपकारी मनुष्य कल्याण का भागी होता है और पापी मनुष्य पाप के फलस्वरूप दुःख का भागी होता है। जो भी इनके सम्पर्क में आता है, वह भी (अपने कर्मानुसार) स्वर्ग या नरक में जाता है।'
 
‘A benevolent man is a part of welfare and a sinful man is a part of misery as a result of sin. Whoever comes in contact with them also goes to heaven or hell (according to his karma).
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)