Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 4.16.d22: राजा यज्ञ करने, दान देने या गुरु की सेवा करने से भी वह धर्म प्राप्त नहीं कर पाते जो उन्हें अपने कर्तव्यों का उचित पालन करने से प्राप्त होता है। | mahabharat अध्याय 4.16: कीचकद्वारा द्रौपदीका अपमान । mahabharat पर्व 4: विराट पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नैव यज्ञैर्न वा दानैर्न गुरोरुपसेवया।
प्राप्नुवन्ति तथा धर्मं यथा कार्यानुपालनात्॥
अनुवाद
राजा यज्ञ करने, दान देने या गुरु की सेवा करने से भी वह धर्म प्राप्त नहीं कर पाते जो उन्हें अपने कर्तव्यों का उचित पालन करने से प्राप्त होता है।
Even by performing sacrifices, giving alms or serving the Guru, kings do not obtain the same Dharma (virtue) as they obtain by properly performing their duties.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥