Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 4.16.d15-d16: मत्स्यराज! जैसे पिता अपने पुत्रों की रक्षा करता है, वैसे ही तुम्हें भी अपनी प्रजा की रक्षा करनी चाहिए। जो राजा काम में डूबा रहता है और अधर्म का आचरण करता है, वह दुष्टात्मा शीघ्र ही अपने शत्रुओं द्वारा पकड़ लिया जाता है। | mahabharat अध्याय 4.16: कीचकद्वारा द्रौपदीका अपमान । mahabharat पर्व 4: विराट पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मत्स्यराज! जैसे पिता अपने पुत्रों की रक्षा करता है, वैसे ही तुम्हें भी अपनी प्रजा की रक्षा करनी चाहिए। जो राजा काम में डूबा रहता है और अधर्म का आचरण करता है, वह दुष्टात्मा शीघ्र ही अपने शत्रुओं द्वारा पकड़ लिया जाता है।
Matsyaraj! Just like a father protects his own sons, you should protect your subjects in the same way. The king who is drowned in lust and does unrighteous deeds, that evil soul is soon captured by his enemies.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥