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mahabharat 4.16.49: द्रौपदी ने पुनः कहा, "मैं आपके लिए मदिरा लाने गई थी। वहाँ कीचक ने राजा के सामने ही राजसभा में मुझ पर आक्रमण कर दिया; जैसे कोई निर्जन वन में किसी असहाय स्त्री पर आक्रमण करता है।" 49.   |   mahabharat अध्याय 4.16: कीचकद्वारा द्रौपदीका अपमान   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 16: कीचकद्वारा द्रौपदीका अपमान  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  4.16.49 
द्रौपद्युवाच
कीचको मावधीत् तत्र सुराहारीं गतां तव।
सभायां पश्यतो राज्ञो यथैव विजने वने॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
द्रौपदी ने पुनः कहा, "मैं आपके लिए मदिरा लाने गई थी। वहाँ कीचक ने राजा के सामने ही राजसभा में मुझ पर आक्रमण कर दिया; जैसे कोई निर्जन वन में किसी असहाय स्त्री पर आक्रमण करता है।" 49.
 
Draupadi said again, "I had gone to bring wine for you. There Keechak attacked me in the royal court in front of the king; just like someone attacks a helpless woman in a lonely forest." 49.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)