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mahabharat 4.16.46: वैशम्पायनजी कहते हैं, "हे राजन! ऐसा कहकर सुन्दर कमर तक लम्बे केशों वाली द्रौपदी शीघ्रतापूर्वक रानी सुदेष्णा के महल में गई। उसके केश खुले हुए थे और उसकी आँखें क्रोध से लाल हो रही थीं। 46.   |   mahabharat अध्याय 4.16: कीचकद्वारा द्रौपदीका अपमान   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 16: कीचकद्वारा द्रौपदीका अपमान  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  4.16.46 
वैशम्पायन उवाच
इत्युक्त्वा प्राद्रवत् कृष्णा सुदेष्णाया निवेशनम्।
केशान् मुक्त्वा च सुश्रोणी संरम्भाल्लोहितेक्षणा॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं, "हे राजन! ऐसा कहकर सुन्दर कमर तक लम्बे केशों वाली द्रौपदी शीघ्रतापूर्वक रानी सुदेष्णा के महल में गई। उसके केश खुले हुए थे और उसकी आँखें क्रोध से लाल हो रही थीं। 46.
 
Vaishmpayana says, "O King! Having said this, Draupadi with beautiful waist-length hair quickly went to the palace of Queen Sudeshna. Her hair was open and her eyes were turning red with anger. 46.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)