| श्री महाभारत » पर्व 4: विराट पर्व » अध्याय 16: कीचकद्वारा द्रौपदीका अपमान » श्लोक 44 |
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| | | | श्लोक 4.16.44  | गच्छ सैरन्ध्रि गन्धर्वा: करिष्यन्ति तव प्रियम्।
व्यपनेष्यन्ति ते दु:खं येन ते विप्रियं कृतम्॥ ४४॥ | | | | | | अनुवाद | | सैरन्ध्री! जाओ, गन्धर्व तुम्हारी रक्षा करेंगे। वे तुम्हारा अनिष्ट करनेवाले को मारकर तुम्हारा दुःख दूर करेंगे।॥44॥ | | | | Sairandhri! Go, the Gandharvas will take care of you. They will kill the one who has harmed you and relieve you of your sorrow.'॥ 44॥ | | ✨ ai-generated | | |
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