vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 4: विराट पर्व
»
अध्याय 16: कीचकद्वारा द्रौपदीका अपमान
»
श्लोक 3
श्लोक
4.16.3
अस्ति मे शयनं दिव्यं त्वदर्थमुपकल्पितम्।
एहि तत्र मया सार्धं पिबस्व मधुमाधवीम्॥ ३॥
अनुवाद
मैंने तुम्हारे लिए यह दिव्य शय्या बिछा दी है। आओ, मेरे साथ बैठो और मधुवीर का मधुर रसपान करो।
I have already laid out this divine bed for you. Come, sit here with me and drink the sweet nectar of Madhuveer.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×