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mahabharat 4.16.23: जो सदा दूसरों को देने वाला, कभी किसी से माँगने वाला नहीं, जो ब्राह्मणों का भक्त और सत्यवादी है, उसकी अभिमानी पत्नी मुझ सारथी के पुत्र ने लात मारी है॥ 23॥   |   mahabharat अध्याय 4.16: कीचकद्वारा द्रौपदीका अपमान   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 16: कीचकद्वारा द्रौपदीका अपमान  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  4.16.23 
ये दद्युर्न च याचेयुर्ब्रह्मण्या: सत्यवादिन:।
तेषां मां मानिनीं भार्यां सूतपुत्र: पदावधीत्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
जो सदा दूसरों को देने वाला, कभी किसी से माँगने वाला नहीं, जो ब्राह्मणों का भक्त और सत्यवादी है, उसकी अभिमानी पत्नी मुझ सारथी के पुत्र ने लात मारी है॥ 23॥
 
The son of a charioteer has kicked me, the proud wife of one who always gives to others but never begs from anyone, who is a devotee of Brahmins and is truthful.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)