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mahabharat 4.15.d7: यह महान गंधर्व गरुड़ और वायु के समान तेजस्वी है। जब यह क्रोधित होता है, तो प्रलयकाल के सूर्य की तरह तीनों लोकों को जला सकता है।   |   mahabharat अध्याय 4.15: रानी सुदेष्णाका द्रौपदीको कीचकके घर भेजना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 15: रानी सुदेष्णाका द्रौपदीको कीचकके घर भेजना  »  श्लोक d7
 
 
श्लोक  4.15.d7 
ते हि क्रुद्धा महात्मानो गरुडानिलतेजस:।
दहेयुरपि लोकांस्त्रीन् युगान्तेष्विव भास्करा:॥
 
 
अनुवाद
यह महान गंधर्व गरुड़ और वायु के समान तेजस्वी है। जब यह क्रोधित होता है, तो प्रलयकाल के सूर्य की तरह तीनों लोकों को जला सकता है।
 
This great Gandharva is as radiant as Garuda and Vayu. When he is enraged, he can burn the three worlds like the sun during the time of doomsday.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)