Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 4.15.d5-d6: तब से जब भी वे उसे देखते हैं, मन ही मन उसे प्रणाम करते हैं। जीवन का नाश करने वाले उन महान गंधर्वों के भय से महाराज कभी भी उसके विषय में मन में विचार तक नहीं करते। | mahabharat अध्याय 4.15: रानी सुदेष्णाका द्रौपदीको कीचकके घर भेजना । mahabharat पर्व 4: विराट पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तब से जब भी वे उसे देखते हैं, मन ही मन उसे प्रणाम करते हैं। जीवन का नाश करने वाले उन महान गंधर्वों के भय से महाराज कभी भी उसके विषय में मन में विचार तक नहीं करते।
Since then, whenever he sees it, he salutes it in his mind. Due to the fear of those great Gandharvas who destroy lives, Maharaj never even thinks about it in his mind.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥