श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 15: रानी सुदेष्णाका द्रौपदीको कीचकके घर भेजना  »  श्लोक d26
 
 
श्लोक  4.15.d26 
एवमुक्तस्तु पापात्मा कीचकस्त्वरित: पुन:।
स्वगृहं प्राविशत् तूर्णं सैरन्ध्रीगतमानस:॥ )
 
 
अनुवाद
उसकी यह बात सुनकर पापी कीचक सैरन्ध्री का स्मरण करता हुआ तुरन्त अपने घर लौट गया।
 
On hearing him say this, the sinful Keechak, thinking of Sairandhri, immediately returned to his home.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)