श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 15: रानी सुदेष्णाका द्रौपदीको कीचकके घर भेजना  »  श्लोक d22
 
 
श्लोक  4.15.d22 
कीचक उवाच
मधु मद्यं बहुविधं भक्ष्याश्च विविधा: कृता:।
सुदेष्णे ब्रूहि सैरन्ध्रीं यथा सा मे गृहं व्रजेत्॥
 
 
अनुवाद
कीचक बोला- "सुदेष्णा! मैंने अनेक प्रकार की मीठी मदिराएँ मँगवाई हैं और नाना प्रकार के भोजन भी तैयार करवाए हैं। अब तुम सैरन्ध्री से कहो कि वह मेरे घर पधारे।"
 
Keechak said- Sudeshna! I have ordered many types of sweet wines and have also prepared various types of food. Now you tell Sairandhri to come to my house.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)