Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 4.15.d15-d16: मैं देखता हूँ, तुम्हारे कारण मेरे सभी भाई-बन्धु नष्ट हो जाएँगे। तुम अपने मन में ऐसी अनुचित इच्छा को स्थान दे रहे हो, इसमें मैं क्या कर सकता हूँ? तुम यह नहीं समझते कि तुम्हारे लिए क्या अच्छा है और केवल काम-वासना के दास बनते जा रहे हो। | mahabharat अध्याय 4.15: रानी सुदेष्णाका द्रौपदीको कीचकके घर भेजना । mahabharat पर्व 4: विराट पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
त्वत्कृते विनशिष्यन्ति भ्रातर: सुहृदश्च मे॥
किं नु शक्यं मया कर्तुं यत् त्वमेवमभिप्लुत:।
न च श्रेयोऽभिजानीषे काममेवानुवर्तसे॥
अनुवाद
मैं देखता हूँ, तुम्हारे कारण मेरे सभी भाई-बन्धु नष्ट हो जाएँगे। तुम अपने मन में ऐसी अनुचित इच्छा को स्थान दे रहे हो, इसमें मैं क्या कर सकता हूँ? तुम यह नहीं समझते कि तुम्हारे लिए क्या अच्छा है और केवल काम-वासना के दास बनते जा रहे हो।
I see; because of you all my brothers and friends will be destroyed. You are giving place to such an inappropriate desire in your mind; what can I do about it? You do not understand what is good for you and are becoming a slave of lust only.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥