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श्री महाभारत
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पर्व 4: विराट पर्व
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अध्याय 15: रानी सुदेष्णाका द्रौपदीको कीचकके घर भेजना
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श्लोक d11
श्लोक
4.15.d11
वैशम्पायन उवाच
एवमुक्तस्तु दुष्टात्मा भगिनीं कीचकोऽब्रवीत्।
अनुवाद
वैशम्पायन जी कहते हैं-राजन्! सुदेष्णा के ऐसा कहने पर दुष्टात्मा कीचक अपनी बहन से बोला.
Vaishmpayana ji says - King! When Sudeshna said this, the evil soul Kichak spoke to his sister.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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