Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 4.15.21: भयभीत द्रौपदी को भयभीत हिरणी के समान आते देख सारथी कीचक हर्ष से भरकर उठ खड़ा हुआ, मानो नदी पार करते हुए कोई यात्री नाव पाकर प्रसन्न हो जाता है।   |   mahabharat अध्याय 4.15: रानी सुदेष्णाका द्रौपदीको कीचकके घर भेजना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 15: रानी सुदेष्णाका द्रौपदीको कीचकके घर भेजना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  4.15.21 
तां मृगीमिव संत्रस्तां दृष्ट्वा कृष्णां समीपगाम्।
उदतिष्ठन्मुदा सूतो नावं लब्ध्वेव पारग:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
भयभीत द्रौपदी को भयभीत हिरणी के समान आते देख सारथी कीचक हर्ष से भरकर उठ खड़ा हुआ, मानो नदी पार करते हुए कोई यात्री नाव पाकर प्रसन्न हो जाता है।
 
Seeing the frightened Draupadi approaching like a scared deer, the charioteer Kichaka stood up filled with joy, as if a traveller crossing a river were happy to have found a boat.
 
इति श्रीमहाभारते विराटपर्वणि कीचकवधपर्वणि द्रौपदीसुराहरणे पञ्चदशोऽध्याय:॥ १५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत विराटपर्वके अन्तर्गत कीचकवधपर्वमें द्रौपदीके द्वारा मदिरानयनसम्बन्धी पंद्रहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १५॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके २५ श्लोक मिलाकर कुल ४६ श्लोक हैं।)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)