Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 4.15.12: हे निर्दोष अंगों वाली देवी, मैं अपने पतियों की दृष्टि में व्यभिचारिणी और स्वेच्छाचारिणी होकर आपके महल में नहीं रहूँगी ॥12॥   |   mahabharat अध्याय 4.15: रानी सुदेष्णाका द्रौपदीको कीचकके घर भेजना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 15: रानी सुदेष्णाका द्रौपदीको कीचकके घर भेजना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  4.15.12 
न चाहमनवद्याङ्गि तव वेश्मनि भामिनि।
कामवृत्ता भविष्यामि पतीनां व्यभिचारिणी॥ १२॥
 
 
अनुवाद
हे निर्दोष अंगों वाली देवी, मैं अपने पतियों की दृष्टि में व्यभिचारिणी और स्वेच्छाचारिणी होकर आपके महल में नहीं रहूँगी ॥12॥
 
O Goddess of flawless body parts, I will not live in your palace being adulterous and willful in the eyes of my husbands. ॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)