श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 15: रानी सुदेष्णाका द्रौपदीको कीचकके घर भेजना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  4.15.10 
सुदेष्णोवाच
उत्तिष्ठ गच्छ सैरन्ध्रि कीचकस्य निवेशनम्।
पानमानय कल्याणि पिपासा मां प्रबाधते॥ १०॥
 
 
अनुवाद
सुदेष्णा बोली - सैरन्ध्री! उठकर कीचक के घर जाओ। कल्याणी! मुझे बड़ी प्यास लगी है; इसलिए वहाँ से मेरे लिए कुछ रस ले आओ जिसे मैं पी सकूँ॥10॥
 
Sudeshna said— Sairandhri! Get up and go to Keechak's house. Kalyani! I am very thirsty; so bring me some juice from there that I can drink.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)