श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 14: कीचकका द्रौपदीपर आसक्त हो उससे प्रणययाचना करना और द्रौपदीका उसे फटकारना  »  श्लोक d4
 
 
श्लोक  4.14.d4 
तदक्षय्यं च धर्म्यं च स्वर्ग्यमाहुर्मनीषिण:।
स्वजातिदारजा: पुत्रा जायन्ते कुलपूजिता:॥
 
 
अनुवाद
बुद्धिमान पुरुषों ने उनके इस कृत्य को सनातन, धर्मसम्मत और स्वर्ग की ओर ले जाने वाला बताया है। अपनी जाति की स्त्रियों से उत्पन्न पुरुष अपने कुल में आदरणीय होते हैं।
 
Wise men have described this act of his as everlasting, in accordance with Dharma and as one who leads to heaven. Men born from women of their caste are respected in their clan.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)