Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 4.14.7: सुदेशने! अपनी सुन्दरता से मुझे दीवाना बनाने वाली यह सुन्दरी मैंने राजा विराट के इस महल में पहले कभी नहीं देखी थी। यह स्त्री अपनी दिव्य सुगंध से मुझे मदिरा के समान मदहोश कर रही है।   |   mahabharat अध्याय 4.14: कीचकका द्रौपदीपर आसक्त हो उससे प्रणययाचना करना और द्रौपदीका उसे फटकारना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 14: कीचकका द्रौपदीपर आसक्त हो उससे प्रणययाचना करना और द्रौपदीका उसे फटकारना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  4.14.7 
नेयं मया जातु पुरेह दृष्टा
राज्ञो विराटस्य निवेशने शुभा।
रूपेण चोन्मादयतीव मां भृशं
गन्धेन जाता मदिरेव भामिनी॥ ७॥
 
 
अनुवाद
सुदेशने! अपनी सुन्दरता से मुझे दीवाना बनाने वाली यह सुन्दरी मैंने राजा विराट के इस महल में पहले कभी नहीं देखी थी। यह स्त्री अपनी दिव्य सुगंध से मुझे मदिरा के समान मदहोश कर रही है।
 
Sudeshne! This beautiful lady who drives me crazy with her beauty was never seen by me before in this palace of King Virat. This lady is intoxicating me like wine with her divine fragrance.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)