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mahabharat 4.14.48: वह गंधर्व मेरा पति है। तू मुझे कभी नहीं पा सकेगा। मेरा पति क्रोधित होकर तुझे मार डालेगा; अतः सावधान। यह पाप-चिंतन त्याग दे। अपना नाश न कर। ॥48॥   |   mahabharat अध्याय 4.14: कीचकका द्रौपदीपर आसक्त हो उससे प्रणययाचना करना और द्रौपदीका उसे फटकारना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 14: कीचकका द्रौपदीपर आसक्त हो उससे प्रणययाचना करना और द्रौपदीका उसे फटकारना  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  4.14.48 
न चाप्यहं त्वया लभ्या गन्धर्वा: पतयो मम।
ते त्वां निहन्यु: कुपिता: साध्वलं मा व्यनीनश:॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
वह गंधर्व मेरा पति है। तू मुझे कभी नहीं पा सकेगा। मेरा पति क्रोधित होकर तुझे मार डालेगा; अतः सावधान। यह पाप-चिंतन त्याग दे। अपना नाश न कर। ॥48॥
 
That Gandharva is my husband. You can never get me. My husband will get angry and kill you; so be careful. Give up this sinful thinking. Do not destroy yourself. ॥ 48॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)