न चाप्यहं त्वया लभ्या गन्धर्वा: पतयो मम।
ते त्वां निहन्यु: कुपिता: साध्वलं मा व्यनीनश:॥ ४८॥
अनुवाद
वह गंधर्व मेरा पति है। तू मुझे कभी नहीं पा सकेगा। मेरा पति क्रोधित होकर तुझे मार डालेगा; अतः सावधान। यह पाप-चिंतन त्याग दे। अपना नाश न कर। ॥48॥
That Gandharva is my husband. You can never get me. My husband will get angry and kill you; so be careful. Give up this sinful thinking. Do not destroy yourself. ॥ 48॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)