श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 14: कीचकका द्रौपदीपर आसक्त हो उससे प्रणययाचना करना और द्रौपदीका उसे फटकारना  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  4.14.47 
सैरन्ध्रॺुवाच
मा सूतपुत्र मुह्यस्व माद्य त्यक्ष्यस्व जीवितम्।
जानीहि पञ्चभिर्घोरैर्नित्यं मामभिरक्षिताम्॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
सैरंध्री बोली, "सारथिपुत्र! आज मोह के जाल में मत फँसो। अपने प्राण मत गँवाओ। तुम्हें यह जानना चाहिए कि पाँच भयंकर गन्धर्व प्रतिदिन मेरी रक्षा करते हैं।"
 
Sairandhri said, "Son of a charioteer, do not fall into the trap of attachment today. Do not lose your life. You should know that five fearsome Gandharvas protect me every day."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)