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श्री महाभारत
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पर्व 4: विराट पर्व
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अध्याय 14: कीचकका द्रौपदीपर आसक्त हो उससे प्रणययाचना करना और द्रौपदीका उसे फटकारना
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श्लोक 42
श्लोक
4.14.42
अहं हि सुभ्रु राज्यस्य कृत्स्नस्यास्य सुमध्यमे।
प्रभुर्वासयिता चैव वीर्ये चाप्रतिम: क्षितौ॥ ४२॥
अनुवाद
'शुभ्रु! सुमध्यमे! मैं इस सम्पूर्ण राज्य का स्वामी और इसका रचयिता हूँ। इस पृथ्वी पर बल और पराक्रम में मेरी बराबरी करने वाला कोई नहीं है ॥ 42॥
‘Subhru! Sumadhyme! I am the lord of this entire kingdom and its creator. There is no one on this earth who can equal me in strength and valour. ॥ 42॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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