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mahabharat 4.14.41: अश्रुपूर्ण! मैं तुम्हारे वश में हूँ और मधुर वचन बोलती हूँ। हे काले नेत्रों वाली सैरन्ध्री! मुझे त्यागने के कारण तुम्हें अवश्य पश्चाताप होगा। 41।   |   mahabharat अध्याय 4.14: कीचकका द्रौपदीपर आसक्त हो उससे प्रणययाचना करना और द्रौपदीका उसे फटकारना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  4.14.41 
प्रत्याख्याय च मां भीरु वशगं प्रियवादिनम्।
नूनं त्वमसितापाङ्गि पश्चात्तापं करिष्यसि॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
अश्रुपूर्ण! मैं तुम्हारे वश में हूँ और मधुर वचन बोलती हूँ। हे काले नेत्रों वाली सैरन्ध्री! मुझे त्यागने के कारण तुम्हें अवश्य पश्चाताप होगा। 41।
 
Tearful! I am in your control and I speak sweet words. O Sairandhri of the black eyes! You will surely repent for rejecting me. 41.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)