श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 14: कीचकका द्रौपदीपर आसक्त हो उससे प्रणययाचना करना और द्रौपदीका उसे फटकारना  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  4.14.40 
नार्हस्येवं वरारोहे प्रत्याख्यातुं वरानने।
मां मन्मथसमाविष्टं त्वत्कृते चारुहासिनि॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
वररोहे! सुमुखी! तुम्हें मेरी प्रार्थना इस प्रकार अस्वीकार नहीं करनी चाहिए! चारुहासिनी! मैं तुम्हारे लिए काम-वासना से पीड़ित हूँ। 40॥
 
Vararohe! Sumukhi! You shouldn't reject my prayer like this! Charuhasini! I am suffering from sexual desire for you. 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)