त्यजामि दारान् मम ये पुरातना
भवन्तु दास्यस्तव चारुहासिनि।
अहं च ते सुन्दरि दासवत् स्थित:
सदा भविष्ये वशगो वरानने॥ ३३॥
अनुवाद
'चारुहासिनी! यदि तुम चाहो तो मैं प्रथम स्त्रियों को त्याग दूँ, अन्यथा वे सब तुम्हारी दासी बनकर रहेंगी। सुन्दरी! सुमुखी! मैं स्वयं सदैव दासी बनकर तुम्हारे अधीन रहूँगा। 33॥
‘Charuhasini! If you want, I will abandon the first women or they will all remain as your slaves. Beautiful! Sumukhi! I myself will always remain under you like a slave. 33॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)