Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 4.14.29: यहाँ अनेक प्रकार के दुःख हैं। अतः तुम ऐसे स्थान में रहने के योग्य नहीं हो। तुम सुख भोगने के योग्य हो, किन्तु यहाँ सुखों से वंचित हो। हे प्रसन्न चाल से चलने वाली सैरन्ध्री! तुम्हें मुझसे उत्तम सुख प्राप्त होने चाहिए।॥29॥ | mahabharat अध्याय 4.14: कीचकका द्रौपदीपर आसक्त हो उससे प्रणययाचना करना और द्रौपदीका उसे फटकारना । mahabharat पर्व 4: विराट पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यहाँ अनेक प्रकार के दुःख हैं। अतः तुम ऐसे स्थान में रहने के योग्य नहीं हो। तुम सुख भोगने के योग्य हो, किन्तु यहाँ सुखों से वंचित हो। हे प्रसन्न चाल से चलने वाली सैरन्ध्री! तुम्हें मुझसे उत्तम सुख प्राप्त होने चाहिए।॥29॥
‘There are many kinds of sufferings here. Therefore you are not fit to live in such a place. You are fit to enjoy pleasures, but you are deprived of pleasures here. O Sairandhri who walks with a cheerful gait! You should receive the best pleasures from me.'॥ 29॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥