श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 14: कीचकका द्रौपदीपर आसक्त हो उससे प्रणययाचना करना और द्रौपदीका उसे फटकारना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  4.14.25 
आत्मप्रदानवर्षेण संगमाम्भोधरेण च।
शमयस्व वरारोहे ज्वलन्तं मन्मथानलम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
वररोहे! आप अपने संगमरूपी मेघों से आत्म-समर्पण की वर्षा करके इस जलती हुई मदन अग्नि को बुझा दीजिये।
 
Vararohe! You extinguish this burning fire of Madan with the rain of self-surrender from your clouds of confluence.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)