श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 14: कीचकका द्रौपदीपर आसक्त हो उससे प्रणययाचना करना और द्रौपदीका उसे फटकारना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  4.14.17 
अतीवरूपिणी किं त्वमनङ्गाङ्गविहारिणी।
अतीव भ्राजसे सुभ्रु प्रभेवेन्दोरनुत्तमा॥ १७॥
 
 
अनुवाद
"क्या तुम कामदेव के अंगों से खेलने वाली अत्यंत सुंदर रानी हो? शुभ्रू! तुम चंद्रमा की अत्यंत सुंदर ज्योति के समान चमक रही हो।"
 
‘Are you the extremely beautiful queen who plays with the body parts of Kamadeva? Subhru! You are shining very bright like the most beautiful light of the moon.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)