श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 14: कीचकका द्रौपदीपर आसक्त हो उससे प्रणययाचना करना और द्रौपदीका उसे फटकारना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  4.14.16 
लक्ष्मी: पद्मालया का त्वमथ भूति: सुमध्यमे।
ह्री: श्री: कीर्तिरथो कान्तिरासां का त्वं वरानने॥ १६॥
 
 
अनुवाद
सुमध्यमे! क्या आप कमल में निवास करने वाली लक्ष्मी हैं या साकार हैं? सुमुखी! लज्जा, श्री, कीर्ति और कांति - इन देवियों में आप कौन हैं? 16॥
 
Sumadhyame! Are you Lakshmi who resides in lotus or a corporeal personality? Sumukhi! Lajja, Shree, Kirti and Kanti – who are you among these goddesses? 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)